Thursday, July 23, 2020

जीवन:जटिल अनुबंध



थोड़ा तुम बढ़ो, थोड़ा बढ़ें हम

थोड़ा तुम झुको, थोड़ा झुकें हम

थोड़ा गम तुम सहो, थोड़ा सहें हम

थोड़ा तुम गढ़ो, थोड़ा गढ़ें हम

थोड़ा मौन तुम धरो, थोड़ा धरें हम

जीवन सहज-सरल नहीं, जीवन है दुर्गम।

थोड़ा कर्म तुम करो, थोड़ा करें हम

थोड़ा मार्ग तुम छोड़ो, थोड़ा छोड़ें हम

थोड़ी हया तुम रखो, थोड़ी रखें हम

थोड़ा सब्र तुम करो, थोड़ा करें हम

विविध रंग है जन-जीवन के

जीवन एक जटिल अनुबंध।

थोड़ा रहम तुम करो, थोड़ा करें हम           

थोड़ा भ्रम दूर करो, थोड़ा करें हम

थोड़ा ढंग तुम सीखो, थोड़ा सीखें हम

थोड़ा संयम तुम रखो, थोड़ा संयम हम

थोड़ा घाव तुम भरो, थोड़ा भरें हम

कालांतर में भर जाएंगे जिंदगी के जख्म़।

थोड़ा सहयोग तुम करो, थोड़ा करें हम

थोड़ा दंभ तुम त्यागो, थोड़ा त्यागें हम

सहयोग और विश्वास आधारित

मृदु-कोमल मानव संबंध

थोड़ा-थोड़ा मिल बांट कर

जीतेंगे हम सब जीवन-जंग।।



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