घर-परिवार की
योजक होती
धैर्य की होती
है प्रतिमूर्ति
कार्य-व्यवहार से
निपुण-दक्ष
सहयोग समन्वय की
देती सीख
घर की लक्ष्मी
होती नारी
नारी घर-परिवार की नींव ।
नारी की पूजा जिस घर में
रहती सुख-शान्ति, समृद्धि
श्रीवृध्दि होती है निश्चित
नकारात्मक शक्तियाँ रहती दूर
संस्कारों की जननी होती
नारी घर-परिवार की नींव ।
सीता और
सावित्री होती
मैत्रेयी, मदालसा, गार्गी
सुर-वंदिता ज्ञान-बुद्धि की
शक्तिस्वरूपा
अप्रतिम
परम मित्र होती
है नारी
नारी घर-परिवार की नींव ।
सकारात्मक परिणाम दृष्टिगोचर
भागीदारी फिर भी न्यून
समता मूलक लोकतंत्र में
नारी रखती दिव्यदृष्टि
नर-नारी प्रगति के पहिए
मिलकर गाएँ जीवन गीत ।
नारी नारायणी है
सचमुच
नारी सशक्तिकरण
है अभीष्ट
जीवन के सभी
क्षेत्रों में
समान अवसर, समान
नीति
प्राणवायु है
समाज की
नारी देश की
सुदृढ़ नींव ।।
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