Monday, April 5, 2021

एकाकीपन का दंश


दुखी, व्यथित, उद्वेलित मन 

अकिंचन, कटा-कटा जीवन 

सामाजिक कार्यों से मोह भंग 

दैनिक चर्या में नहीं तारतम्य

उत्साहहीन, निष्क्रिय, वीरान 

एकाकीपन की है पहचान । 

न हितैषी ना कोई मीत

कर्णप्रिय नहीं लगे संगीत

सशंकित चंचल मन भयभीत

निराशा, असहज, गमगीन

देह कई रोगों से ग्रस्त

एकाकी जीवन है अभिशप्त ।

स्वजन से नहीं रहता संपर्क

जीवन बन जाता है नर्क

बरबस आता रहता है ‌क्रोध 

नहीं सही-ग़लत का बोध

मन में आते तुच्छ विचार

एकाकीपन सचमुच है संताप ।

सुख-दुःख का संयोग है जीवन

कल क्या होगा न जाने जन

परिवर्तनशील, नश्वर जीवन में 

घातक एकाकीपन का दंश 

समय चक्र सार्वभौम सतत् 

संतुलित रहें  और स्थितप्रज्ञ । 

आस्था, विश्वास का दीप जलाकर 

जीवन में पाले कुछ शौक 

परोपकार के कार्यों में रत 

जीवन-चर्या हरदम व्यस्त 

एकाकीपन कथमपि  नहीं  स्वर्ग 

सामाजिकता का मार्ग करे प्रशस्त ।

पठन-पाठन, बागवानी, संगीत 

अध्यात्म, योग या प्राणायाम 

सकारात्मक सोच सहेजकर

जीवन को दें नव-आयाम 

खुशी की वजह खोजें जीवन में 

सुख-शांति, संयम का दे पैगाम ।।   


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