दुखी, व्यथित, उद्वेलित मन
अकिंचन, कटा-कटा जीवन
सामाजिक कार्यों से मोह भंग
दैनिक चर्या में नहीं तारतम्य
उत्साहहीन, निष्क्रिय, वीरान
एकाकीपन की है पहचान ।
न हितैषी ना कोई मीत
कर्णप्रिय नहीं लगे संगीत
सशंकित चंचल मन भयभीत
निराशा, असहज, गमगीन
देह कई रोगों से ग्रस्त
एकाकी जीवन है अभिशप्त ।
स्वजन से नहीं रहता संपर्क
जीवन बन जाता है नर्क
बरबस आता रहता है क्रोध
नहीं सही-ग़लत का बोध
मन में आते तुच्छ विचार
एकाकीपन सचमुच है संताप ।
सुख-दुःख का संयोग है जीवन
कल क्या होगा न जाने जन
परिवर्तनशील, नश्वर जीवन में
घातक एकाकीपन का दंश
समय चक्र सार्वभौम सतत्
संतुलित रहें और स्थितप्रज्ञ ।
आस्था, विश्वास का दीप जलाकर
जीवन में पाले कुछ शौक
परोपकार के कार्यों में रत
जीवन-चर्या हरदम व्यस्त
एकाकीपन कथमपि नहीं स्वर्ग
सामाजिकता का मार्ग करे प्रशस्त ।
पठन-पाठन, बागवानी, संगीत
अध्यात्म, योग या प्राणायाम
सकारात्मक सोच सहेजकर
जीवन को दें नव-आयाम
खुशी की वजह खोजें जीवन में
सुख-शांति, संयम का दे पैगाम ।।
No comments:
Post a Comment