स्वाभिमान-अभिमान में
बहुत सूक्ष्म है फ़र्क़
स्वाभिमान है स्व की रक्षा
अभिमान में निहित वर्चस्व
स्वाभिमान आभूषण मानव का
अभिमान दुर्गुण, अभिशाप
स्वाभिमान में अंतर्दर्शन
अभिमान पतन, संताप ।
स्वाभिमान
स्व-रक्षा का साधक
आत्मसम्मान का
है प्रतीक
अभिमान स्वार्थ
आधारित
कोई न होते
सच्चे मीत
प्रतिष्ठा, सम्मान
की रक्षा
हरदम करते हैं
खुद्दार
कार्य-व्यवहार, आचरण
की
शुचिता है
अनिवार्य ।
अभिमान पर विजय पाना ही
है सही स्वाभिमान
स्वाभिमान की श्रेष्ठता में
समाहित सत्य-ईमान
अभिमान में अंतर्निहित है
मात्र स्वयं का हित
अहं पर विजय पाने में
मानव की है सच्ची जीत ।
स्वाभिमान पर
होता जब
बार-बार आघात
टूट जाते हैं
संबंध
रिश्ते होते
तार-तार
भावनाओं की करें
क़द्र
करें नहीं कभी
अपमान
रिश्ते होते हैं
अमूल्य
दें उचित
मान-सम्मान ।।

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