Thursday, September 9, 2021

स्वाभिमान-अभिमान


स्वाभिमान-अभिमान में

बहुत सूक्ष्म है फ़र्क़

स्वाभिमान है स्व की रक्षा

अभिमान में निहित वर्चस्व

स्वाभिमान आभूषण मानव का

अभिमान दुर्गुण, अभिशाप

स्वाभिमान में अंतर्दर्शन

अभिमान पतन, संताप ।

स्वाभिमान स्व-रक्षा का साधक

आत्मसम्मान का है प्रतीक

अभिमान स्वार्थ आधारित

कोई न होते सच्चे मीत

प्रतिष्ठा, सम्मान की रक्षा

हरदम करते हैं खुद्दार

कार्य-व्यवहार, आचरण की

शुचिता है अनिवार्य ।

अभिमान पर विजय पाना ही

है सही स्वाभिमान

स्वाभिमान की श्रेष्ठता में

समाहित सत्य-ईमान

अभिमान में अंतर्निहित है

मात्र स्वयं का हित

अहं पर विजय पाने में

मानव की है सच्ची जीत ।

स्वाभिमान पर होता जब

बार-बार आघात

टूट जाते हैं संबंध

रिश्ते होते तार-तार

भावनाओं की करें क़द्र

करें नहीं कभी अपमान

रिश्ते होते हैं अमूल्य

दें उचित मान-सम्मान ।।

 

 


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