Tuesday, April 4, 2023

आकर्ष-आकर्षक

घर-आँगन की रौनक है

करता हरदम सैर-सपाटा

नंद के लाल सदृश लीला

कभी ज्वार और कभी भाटा

सबका प्यारा,राज-दुलारा

आकर्ष अद्भुत और निराला ।

                        भय नहीं डांट-डपट का किंचित

                        आन-बान का नहीं पता

                        हरपल-हर क्षण चंचल-सा मन

                        मधुर हास मन आनंद दाता

                        हर्षित-पुलकित पुरजन-परिजन

                        आकर्ष की अनुपम बाल अदा ।

निर्मल-निश्छल है मुखमण्डल

काले बाल सम काली घटा

धमा-चौकड़ी इधर-उधर

अस्तव्यस्त घर रहे सदा

माँ के आँचल मे छुप जाए

हमने तो कुछ नहीं किया ।

                        बाल अदा से वारी-न्यारी

                        माँ-दादी का दुख दर्द मिटा

                        तनाव भंजक आकर्ष-आकर्षक

                        नाना बिसरे व्याधि-व्यथा

                        आनंदित हैं दादा शशि-सम

                        निरखि बाल कृष्ण लीला ।

आकांक्षा-तुषार के जिगर का टुकड़ा

आकर्ष पर बरसे आशीष सदा

आशीर्वाद का है आकांक्षी

सब दें इसे आशीष–दुआ

सबके आँगन गूँजे किलकारी

ईश्वर की सबपर सदा कृपा ।।

Thursday, March 30, 2023

खुशी: अंतर्मन की ऊर्जा


खुशी
है अंतर्मन की ऊर्जा
खुशी नहीं है बाह्य पदार्थ
भौतिकता से कभी न संभव
मुदित-मन खुशी का राज
प्राप्त वही पर्याप्त जीवन में
अनंत इच्छा से होती व्याधि
आवश्यकता-इच्छा में अंतर से
सुखमय जीवन, खुशी की प्राप्ति ।
                            खुशी तो रंग-विरंगी तितली
                            पीछा कर मिलता है कष्ट
                            धैर्य मात्र अवलंब मनुज का
                            खोज खुशी की सचमुच व्यर्थ
                            सरल जीवन, सदविचार की
                            जग में होती श्रद्धा-कद्र
                            जागृत कर सकारात्मक ऊर्जा
                            सुख-शांति सुलभ सर्वत्र ।
अंतर्मन में ही टटोलना
सुख-शांति, खुशी की राह
परोपकार-उपकार है माध्यम
प्रकृति परिवर्तन की दरकार
माया-मोह से दूर खुशी
मायापति खोलें खुशी के द्वार
स्थितप्रज्ञता है श्रेयस्कर
अल्प इच्छा जीवन आधार ।
                        जीवन सुख-दुख का है संगम
                        हास्य-रुदन का हो आलिंगन
                        समय-चक्र-चालित है जीवन
                        वक्त प्रबल व्यक्ति अकिंचन
                        खुशी कर्मफल भोग चिरंतन
                        हार-जीत का हो अभिनंदन
                        ईश्वर इच्छा ही हृदयंगम
                        खुशी और गम ही जीवन-दर्शन ।।

Tuesday, March 7, 2023

कवि-कुल-केहरि कालिदास


वैदर्भी रीतिक कविकुल गुरु

साहित्य क्षितिज केर अलंकार  

जीवन दर्शनक विविध रूप

पौराणिक कथा लेखन आधार

साहित्य मे संगीतक समावेश

कविता, नाटक, कामिनी विलास

आदर्शवादी परंपरा शृंगार-रस संग

कवि-कुल-केहरि छथि कालिदास ।

रघुकुल राजा लोकनिक वर्णन

‘रघुवंशम्’ अद्वितीय महाकाव्य

पुरुरवा-उर्वशीक प्रेमक चित्रण

‘विक्रमोर्वशीयम्’ नाटकक कथा-सार

प्रकृतिक मानवीकरण ‘मेघदूतम्’ मे

यक्ष-मेघ सरस संदेश संवाद

‘ऋतुसंहारम्’ मे षट्ऋतु वर्णन

कवि-कुल-केहरि छथि कालिदास ।

शकुंतला-दुष्यंतक प्रेम आधार

‘अभिज्ञानशाकुंतलम' शाश्वत कृति

अग्निमित्र-मलविकाक प्रेम प्रबल

साहित्यक मणिमाला ‘मालविकाग्नि मित्र’

‘कुमारसम्भवम्’ कार्तिकेयक जन्म गाथा

‘ज्योतिर्विदभरणम्’ अति विशिष्ट

साहित्यक विधा सभ आत्मसातं

कवि-कुल-केहरि छथि कालिदास ।

ज्ञान-विज्ञान ओ विधि-दर्शन

प्रवाह प्राज्जलता विद्यमान

सांस्कृतिक चेतना केर संवाहक

ध्वनि-अर्थक सद्यः तादात्म्य

‘त्वमेवाहं’ केर वरद पुत्र

साहित्य-सलिल सरसिज समान

मुख-मंडल पर सरस्वती वास

कवि-कुल-केहरि छथि कालिदास ।।

Thursday, January 5, 2023

नव-पुरातन


शाश्वत-सनातन, नूतन-पुरातन

हर पल, हर क्षण, नव अन्वेषण

क्षण में नूतन, क्षण में पुरातन  

नव-पुरातन, जीवन आभूषण ।

         समय चक्र, परिवर्तित जीवन

         बीता पल-क्षण, अंश पुरातन

         वक्त की सत्ता जारी आजीवन

        नित्य नवल औ’ चंचल जीवन ।

परिवर्तन लक्षित संवर्धन

प्रकृति को प्रिय है परिवर्तन

पतझड़ अनुवर्ती वसंत आकर्षण  

परिवर्तन आनंद का दर्पण ।  

        जीवन-ध्वनियाँ नव-पुरातन

        सुख- दुख का अनवरत प्रक्रम

        पुरातन निसृत है नवीनतम

        जीवन मणियाँ नव-पुरातन ।

नव-पुरातन जीवन-दर्शन

कर्म-पथ पर जीवन अर्पण

मन अश्व सम, सतत नियंत्रण

नव-पुरातन हो हृदयंगम ।।

Saturday, October 22, 2022

सौन्दर्य-बोध

 
तन-मन को करता आनंदित

पुलकित करता अंतर्मन

पल-पल परिलक्षित परिवर्तन

सौन्दर्य है मानव गुण-धर्म

रुचि, संस्कार परिवेश आधारित

निर्मल-धवल, अप्रतिम, अनुपम ।

सौन्दर्य शक्ति, प्रेरणा-श्रोत

सद्गुण, सौहार्द्र से ओतप्रोत

नैतिक गुणों की है परख

मानव मूल्यों का मुकुलित सरोज

करुणा, दया, प्रेम का संगम

मन–वचन-कर्म सुंदर संयोग।

सौन्दर्य नहीं त्वचा का रंग

सौम्य, सुखद है भाव-तरंग

सौन्दर्य सजावट का विलोम

कथमपि नहीं कृत्रिम बहिरंग

सौन्दर्य सत्य, शिव, औ सुंदर

आंतरिक सौन्दर्य ही सर्वोत्तम ।

सौन्दर्य है शिक्षा-दीक्षा

मानव-मूल्यों की संरक्षा

कर्तव्य-बोध की कर्मठता

कथनी–करनी में उज्ज्वलता

नयन-सुख की नहीं आकुलता

मानव-जीवन की सार्थकता ।

सौन्दर्य व्यक्तित्व, सौन्दर्य चरित्र

सौन्दर्य अलौकिक परिधान

हृदयागत भाव में है निहित

आंतरिक सौन्दर्य ही दीप्तिमान

मृग-मरीचिका का करें त्याग

सौन्दर्य-शक्ति का मान-सम्मान ।।

Saturday, August 20, 2022

संबंध-समीक्षा



उम्मीदों की तिलांजलि में ही

संबंधों की दुनिया निर्भर होती

उपयोगिता आधारित होते संबंध

व्यक्तित्व की गणना नहीं होती

विचित्र होते हैं मानवीय संबंध

परिवर्तनशील इसकी प्रकृति होती ।

     सुख में संबंधों की आती है बाढ़

     दुख ही इसकी सही कसौटी होती

           बेजान होते हैं दिखावटी संबंध

           आत्मीयता तनिक भी नहीं होती

     नाजुक-सी होती है संबंध की डोर

           आघात सहने की आदी नहीं होती ।

हर संबंध फल दे जरूरी नहीं

छाया भी मयस्सर नहीं होती

इच्छा में सन्निहित है कष्ट

सीमित इच्छा दुखदायी नहीं होती

अस्मिता की रक्षा सर्वोपरि सदा

संबंध ढोने की बाध्यता नहीं होती ।

           कुछ अच्छे भी लोग हैं जग में

           जिनपर टिकी निगाहें होतीं

           त्याग, सहयोग आधारित हैं संबंध

           प्राप्ति की प्रत्याशा कष्ट ही देती

           संबंध विश्वास-शुचिता पर निर्भर

           खंडित संबंध की समीक्षा नहीं होती ।।

Friday, August 12, 2022

शिक्षक पूज्य, ईश्वर तुल्य ।

जीवन गढ़े कुम्हार सदृश 

शिक्षक समाज के शिल्पकार

मानवीय गुणों के उत्प्रेरक

सफल जीवन के सूत्रधार

तम करे दूर, उज्ज्वल प्रकाश

अंतर्निहित क्षमता विकास

शिक्षक जगमग प्रकाश-पुंज

शिक्षक पूज्य, ईश्वर तुल्य ।

             शिक्षक पवित्र त्रिवेणी संगम

             गंगा, यमुना, सरस्वती

             गंगा शाश्वत मूल्य की रक्षक

             यमुना जीवंत वर्तमान नीति

             सरस्वती में समाहित है भविष्य

             शिक्षक जीवन मूल्य प्रतीक

             शिक्षक अभाव में जीवन शून्य

             शिक्षक पूज्य, ईश्वर तुल्य ।

शिष्य-शिक्षक का अटूट है बंधन

श्रद्धा, विश्वास का प्रतीक

शिक्षक हैं जीवन का दर्पण

कर्तव्य पालन की देते सीख

अनुशासन-पाठ, दायित्व-बोध

शिक्षक सहयोगी मानव मीत

उनकी देन अद्भुत-अमूल्य

शिक्षक पूज्य, ईश्वर तुल्य । 

          शिक्षा का परिदृश्य है बदला

          बदला शिक्षक का दायित्व

          व्यवसायीकरण की आपाधापी में

          बदल गया है जीवन-मूल्य

          नैतिक मूल्यों की संरक्षा

          शिक्षक का गुरुतर दायित्व

          शिक्षा पर निर्भर मानव वजूद

          शिक्षक पूज्य, ईश्वर तुल्य ।

शिक्षक सचमुच हैं असाधारण

साधारण कथमपि नहीं शिक्षक

वे तो हैं राष्ट्र निर्माता

निर्भर उनपर सुनहरा कल

मानव भविष्य शिक्षा पर निर्भर

शिक्षक हैं आराध्य-स्तुत्य

शिक्षक की महिमा अनंत-अतुल्य

शिक्षक पूज्य, ईश्वर तुल्य ।।