Saturday, July 25, 2020

पावस-संदेश



उमस भरी गर्मी के बाद

आती मनभावन बरसात  

नभ में छाते काले मेघ

मानो नभ ने बदले वेश

सावन-भादो मास मतंग

नई चेतना,नव उमंग

मही की मेघ से मनुहार

बरसे जल अमृत बौछार।   

वन-उपवन और खर-पतवार

वर्षाजल जीवन संचार

ताल-तलैया,नदी-नाल

धरती माँ की बुझती प्यास

जगह जगह फैली हरियाली

प्रकृति की श्रृंगार निराली

हरित भूमि,हरा परिवेश

फूले नहीं समाते खेत। 

बच्चे खूब नहाते-गाते

कागज की वे नाव बनाते

धरती से टकराती बूंदें

राग मल्हार सुनाती बूंदें

मोर नृत्य,झिंगुर का गान

टर्र-टर्र मेंढक की सुर तान

प्रकृति की है सुंदर रचना

पावस है प्रकृति का गहना।

धरती को हरियाली चूनर

हरी-भरी मखमली घास

जगह-जगह सावन के झूले

श्रावन उत्सव में परिहास

नाग पूजा रक्षाबंधन संग

तीज पर्व प्रचलित गणगौर

वर्षा ऋतु कृषक हितकारी

पुलकित मन खुशियाँ चहुँओर।

वर्षा रानी जल संवाहक

जल प्रलय की होती कारक

अतिवृष्टि से आती बाढ़

पीड़ितों पर विपत्ति की मार

पर्यावरण संरक्षण संवर्धन

वृक्षारोपण हरित प्रदेश

जल हरियाली से ही जीवन

पावस का शाश्वत संदेश।।


3 comments:

  1. बहुत सुन्दर रचना ।प्राकृतिक छटाओं से भरपूर ।

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  2. बहुत सुन्दर रचना । प्राकृतिक छटाओं से भरपूर ।

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  3. कविवर, कविता सग्रहों में एक अओर सुन्दर पंखूडी
    धन्यवाद ⚭ कतई छी श्री मान्

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