Friday, July 31, 2020

सशक्त महिला: सशक्त समाज


सरस्वती, लक्ष्मी, दुर्गरूपा

विद्या,धन और शक्तिस्वरूपा

नारी शक्ति शौर्य मंजूषा

जगत-जननी अंबे विश्वरूपा

नारी ईश की अनुपम सृष्टि

'का ते स्तुति, स्तव्य परापरोक्ति'

ब्रह्मा की काया से उत्त्पति

मनु-शतरूपा से निर्मित सृष्टि।

वेद-ऋचाओं की अमृत धारा

रोमला, अपाला, विश्वानारा

गार्गी-मैत्रेयी विदुषी नारी

वैदिक काल में प्रसिद्धि पाई

दुर्गावती, पद्मावती, लक्ष्मीबाई

वीरांगनाओं ने लड़ी लड़ाई

देश की रक्षा, आत्म सम्मान

खट्टे किए दुश्मन के दाँत।

जीवन के विविध क्षेत्रों में                            

स्त्री-पुरुष का सदृश योगदान

सामाजिक, आर्थिक परिदृश्य

राजनीति, साहित्य प्रमाण

सिने जगतखेलकूद संग

विज्ञान जगत, शोध अंतरिक्ष

महिलाओं ने लहराए परचम

वैभव-विकास में हुई श्री वृद्धि।

जीवन-रथ के हैं दो पहिए

नर-नारी द्वय एक समान

जन्म से पैदा नहीं कोई औरत

समाज प्रदत्त है अबला नाम

नारी स्थिति की दशा-दिशा पर

वांछनीय है चिंतन-मंथन

भ्रूण हत्या,मानव तस्करी

दहेज-प्रथा पर पूर्ण प्रतिबंध।

सशक्तीकरण का संक्रमण काल

शिक्षा-साक्षरता का प्रसार

बाल-विवाह, घरेलू हिंसा

देह-व्यापार पर पूर्ण निषेध

समान अवसर मिले सभी को

नहीं हो कोई लिंग भेद।

महिलाएं गाती मुक्ति गीत

है मुक्तिमार्ग कंटकाकीर्ण

कानून-व्यवस्था यद्यपि पर्याप्त

हृदय-परिवर्तन की प्रबल दरकार

सामाजिकआर्थिक जागृति से ही

स्थिति में परिवर्तन संभाव्य

सूचना, शिक्षा और संचार

सशक्त महिला, सशक्त समाज।।


2 comments:

  1. वाह, क्या बात है👌🏻

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  2. श्रृष्टि स्वरूपा नारी, नाड़ी धड़कन के बीज ।
    नारी शक्ति स्वरूपा, नारी है अनमोल ।
    आपकी रचना जो नारी जाति की महत्ता को कविता के रूप में परिभाषित की गई है, बहुत ही प्रेरणादायक है ।
    संजय कुमार झा

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