तुमने लाखों घर को लीले,
लोगों के संसाधन छीने।
कहीं छोड़ दी घर वीराना,
सुबक रहा बच्चा अनजाना।
लाशों के अंबार लगाकर,
बड़ी तबाही तुमने आनी,
अब मत आना लहर सुनामी।।
नाम सुनामी, काम बेमानी,
तुमने की सारी मनमानी।
बड़ी त्रासदी तुमने लाई,
हठी कुलक्षणी सुरसा माई।
कितनी भूख लगी थी तुमको,
हाहाकारी निर्दयी अभिमानी,
अब मत आना लहर सुनामी।।
मानवता से हार गई तुम
चोरी-छिपके भाग गई तुम।
मानवता से मत टकराना,
मात अंत में तुझे है खाना,
लोगी तुम कितनी कुर्बानी।
अब मत आना लहर सुनामी।।
बुलबुल, तितली, हुदहुद, निसर्ग
फानी, निलोफर या अम्फान
सब पर लगे हुए हैं पहरे
दूर रखना है घातक लहरें
मानवता ने है प्रण ठानी
सजग-सतर्क हैं सुधि-विज्ञानी
अब मत आना लहर सुनामी ।।

सटीक शब्द, सुंदर रचना🙏🏻
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