शिवशंकर के मुख से निःसृत
ॐ से सृजित है सगर संसार
उपनिषद का है आरंभ-अंत
ॐ जगत का मूलाधार
सकारात्मकता का संचार-मंत्र
ॐ मानव कुल कंठहार ।
वेदों का मूल है, ॐ है सृजन
ॐ ही सृष्टि है, ॐ ही वरण
ॐ ही ध्वनि है, ॐ ही ब्रह्मांड
ॐ ही ऊर्जा है, सकल वेद-पुराण
एकाक्षर में सर्वस्व समाहित
ॐ ब्रह्म तत्व ज्ञान-विज्ञान ।
विधि-हरि-हर सुर सर्व है
ॐ है कर्म, प्रबल कर्तव्य
ॐ सायक, वाण भी है
ॐ ही है परम लक्ष्य
सभी धर्मों का सार है
ॐ ही है जीवन तथ्य ।
पत्रम्, पुष्पम्, फलम्, ॐ
उच्च चेतना का है श्रोत
योग, ध्यान ,अभ्यास है
नाश करता मन दोष
ॐ सद्यःब्रह्म ज्योति
ॐ जागृत रश्मि-प्रद्योत ।।





