Tuesday, March 30, 2021

गीता: जीवनरेखा

योगेश्वर कृष्ण की वाणी

ज्ञान, कर्म और भक्ति का योग

भाग महाभारत के भीष्म पर्व का

व्यावहारिक मार्ग का उपदेश

उपनिषदों का सार है गीता

सर्वमान्य है ग्रंथ पवित्र

कृष्ण-अर्जुन संवाद के रूप में

वाचनामृत, है मानवमित्र ।

                     अठारह अध्यायों में है वर्णित

                     समाहित हैं सात सौ श्लोक

                     जीवन प्रबंधन, दार्शनिक दृष्टिकोण

                     निष्काम कर्म पर सम्यक् ज़ोर

                     धर्म-कर्म, यम-नियम की चर्चा

                     सृष्टि उत्पत्ति, जीव विकास

                     उपासना-प्रार्थना, मोक्ष, युद्ध

                     राजनीति, मैत्री, आचार-विचार । 

भगवान कृष्ण ने विवस्वान को

विवस्वान ने मनु को बतलाया

मनु ने इक्ष्वाकु को बतलाकर

जीवन का मर्म-रहस्य समझाया

अनिश्चय, हताशा की स्थिति में

गीता सचमुच है पथदर्शक

जटिल समस्यायों से अविचलित

मानव रह सकता स्थितप्रज्ञ ।

                   प्रथम अध्याय में है वर्णित

                   अर्जुन के हृदय का क्लेश-विषाद

                   द्वितीय और तृतीय अध्याय में

                   सांख्य योग, कर्मयोग सविस्तार

                   ज्ञान, कर्म, सन्यास योग का

                   विश्लेषण चतुर्थ-पंचम अध्याय

                   आत्मसंयम, ज्ञान-विज्ञान योग से

                   परिपूरित षष्ठ-सप्तम अध्याय ।

अष्टम में अक्षर ब्रह्मयोग का वर्णन

नवम राज विद्याराज गुह्ययोग

दसम-एकादशम में पाते हैं

विभूति विश्वरूप दर्शन योग

द्वादश में भक्ति योग है वर्णित

त्रयोदश क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विचार

गुणत्रय विचार योग चतुर्दश में

पंचदश का पुरुषोत्तम योग आधार।

                         षोडश-सप्तदस अध्याय में क्रमशः

                         देवासुर संपति श्रद्धात्रय विभाग

                         गीता-सार अंतिम अध्याय में

                         मोक्ष संन्यास योग है अभिप्राय

                         श्रीमद्भगवद्गीता का पठन-अनुशरण

                         अंत: करण करता है शुद्ध

                         जीवन की चिंता, मोहमाया से

                         मानव को मिलती है मुक्ति ।

ज्ञानरूपी प्रकाश है सचमुच

कर्तव्यज्ञान का अनुपम श्रोत

जीवन के मार्गदर्शी सिद्धान्तों से

समस्तग्रंथ है ओतप्रोत

गीता नहीं है ग्रंथमात्र

यह तो है जीवन रेखा

मानव तो निमित्त-मात्र है

कर्म करें, नहीं फल की चिंता।।

Tuesday, March 23, 2021

शब्द-सामर्थ्य


अभिधा,लक्षणा,व्यंजना

शब्द-शक्ति के रूप

कथित,लक्षित,व्यंजित

शब्द हैं ब्रह्म स्वरूप

शब्द शक्ति से ही नि:सृत

     काव्य में रस-संचार

संगीत की स्वर-लहरी में

छिपा शब्द-भंडार ।

शब्दों से ही मिलती है

ताली या आपत्ति

शब्द प्रमाणित औषधि है,

घर लाए सुख-शांति

शब्द-शक्ति से बन जाते है

मनुज के बिगड़े काम

शब्दों पर ही निर्भर हैं

अच्छे-बुरे परिणाम ।

बनते-बिगड़ते, रिश्ते-नाते

शब्दवाण दुश्मन घर लाते

शब्द हार है,शब्द जीत भी

शब्द हँसाते,शब्द रुलाते

दिल-दिमाग़ से सोचें बोलें

शब्द अमृत-विष बरसाते

मधुर शब्दों के वातायन

वातावरण को स्वच्छ बनाते ।

मृदु बोली है रामवाण,

कर सकते निश्चित हितसाधन

जादुई प्रभाव शब्द का,

वाक् संयम,उचित अनुशासन

शब्द है व्यवहार परिचायक,

शब्द प्रकट करते संस्कार

बोलें प्रिय-मधु शब्द सदा,

सार्थक शब्दों का करे व्यवहार।।

 

Saturday, March 20, 2021

स्वतंत्रता नहीं है बंधनों का अभाव

स्वतंत्रता है मनुज का

जन्मसिद्ध अधिकार 

अप्रतिम भाव है 

है सुखद अहसास

संतुष्टि,आत्मसम्मान का

स्वतंत्रता है पर्याय 

प्रबंधन है जीवन का 

नहीं है बंधनों का अभाव ।

                स्वयं के कार्यकलाप का 

                स्वयं से नियंत्रण 

                व्यक्ति और समाज के 

                संबंध का निरुपण

                स्वतंत्रता अधिकार है 

                स्वतंत्रता कर्तव्य भी 

                मनुज की दशा–दिशा  

                सकारात्मक मार्ग भी ।

नैतिक गुणों का श्रोत है 

व्यक्तित्व विकास का आधार 

सोपान है समृद्धि का 

लक्ष्यप्राप्ति का है सार 

सामाजिक सुख-शान्ति हेतु 

स्वतंत्रता है अमूल्य 

स्वतंत्रता तो साध्य है 

इसके अनेक रूप ।

सामाजिक बंधनों में ही

स्वतंत्रता है सार्थक

मानव अस्तित्व का

स्वतंत्रता है रक्षक

स्वतंत्रता का उपभोग करें

औरों का भी रखे ध्यान

सामाजिक जीवन में ही

निहित है मानव कल्याण ।।


Sunday, February 21, 2021

मातृभाषा


मातृभाषा है मनुज की

किलकारी की पहली भाषा

पारिवारिक सम्पर्क-संसर्ग में

विकसित जीवन की अभिलाषा

स्थान-समूह-परिवेश की भाषा 

अपनापन का देती भान 

भावनाओं की समझ सिखाती 

मातृभाषा है प्रथम सोपान। 

     संस्कार-व्यवहार का मूल श्रोत

        नैतिक विकास का सहज मार्ग 

      मातृभाषा के सहज संगम से 

       मानव व्यक्तित्व के खुले द्वार 

        मौलिक विचारों की केंद्रबिन्दु

        मातृभाषा आत्मा की आवाज़

      सीख,समझ,ज्ञान की जननी

             जीवन-संगीत की सुरमयी साज।

संस्कार-व्यवहार का आधार 

सभ्यता–संस्कृति संग जुड़ाव

मातृभाषा में निहित है

आत्मरक्षा का प्रबल भाव 

विकास प्रक्रिया में है साधक 

अपूर्व आनंद का देती भान 

मातृभाषा का अभिनंदन-वंदन 

सदैव दें इसे अधिमान।

बहुभाषाभाषी है भारत 

विविधता में एकता का प्रतीक 

एक सूत्र में बँधे हैं हमसब

भाषा यद्यपि भिन्न -भिन्न 

एकता-अखंडता परम ध्येय है 

अलग-अलग भले परिधान 

मातृभाषा के मान-सम्मान संग 

राष्ट्रभाषा का गौरवगान ।। 


Sunday, February 14, 2021

जीवन-प्रबंधन

मानव जीवन है अनमोल 

बिना प्रबंधन डांवांडोल

प्रबंधन से सम्भव दिव्य-दृष्टि

सकारात्मक सोच, जीवन-संतुष्टि 

संयम, समन्वय और सहयोग

सफल प्रबंधन के मूल श्रोत।

मानव स्वभाव और व्यवहार

जीवन प्रबंधन का आधार

जीवन का कारक नेक कर्म

सुख-शांति, समृद्धि का मर्म

जीवन एक पवित्र अनुबंध

सही प्रबंधन ही अवलंब।

जीवन-यात्रा बड़ी विचित्र

चाही-अनचाही घटना निश्चित

परिस्थिति पर चले नहीं वश

मन: स्थिति अनुकूल करना कर्तव्य

बिखरा-बिखरा विचलित मन 

स्थितप्रज्ञता में है आनंद।

    सही-सटीक प्रबंधन सार

    कर सकते सपने साकार

           सही इरादा, कर्म प्रधान         

      सचमुच जीवन का वरदान

जीवन-पथ का अग्रदूत

           सफल प्रबंधन, स्वर्णिम-सूत्र।।


Wednesday, February 10, 2021

राजस्व कर्मचारी: उत्तरदायित्व एवं कार्य


 आर्थिक विकास, शहरीकरण

औद्योगीकरण हेतु अनिवार्य 

जमीन का टुकड़ा मात्र नहीं 

भूमि अस्मिता का है पर्याय 

जन-जीवन है भू-आधारित 

जनमानस है भूमि पुत्र 

अनुपम श्रोत शक्ति-ऊर्जा का 

भूमि से जुड़ा मानव अस्तित्व। 

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग है नोडल

भूमि सुधार के नीति श्रोत 

अंचल स्तर पर भूमि सुधार हेतु 

राजस्व कर्मचारी हैं थामे डोर

राजस्व प्रशासन के अंतर्गत 

प्रमंडल, जिला, अनुमंडल, अंचल 

प्रशासनिक, भौगोलिक दृष्टिकोण से 

दस से बीस हल्कों में विभक्त हैं अंचल।

प्रत्येक कर्मचारी के जिम्मे है 

एक या अधिक हल्के का प्रभार 

भूमि संबंधी मामलों के संदर्भ में 

कर्मचारी पर है दारोमदार 

कर्मचारियों के मार्गदर्शन हेतु 

वर्ष 1953 का अनुदेश उपलब्ध 

‘इन्स्ट्रक्शन्स फ़ॉर द गाइडन्स ऑफ कर्मचारिज’ का 

राजस्व कर्मी ले सकते संदर्भ। 

लगान वसूली, दाखिल खारिज 

जमावंदी पंजी करना अपडेट 

लोकभूमि का सर्वे-संरक्षण 

मुख्य कार्यों से है अभिप्रेत 

कृषि सांख्यिकी, प्राकृतिक आपदा 

सैरात बन्दोबस्ती में सहयोग 

जनगणना, पशुगणना में भी 

कर्मचारी का अहम है रोल। 

संप्रति कार्य प्रकृति में परिवर्तन 

समय, परिस्थिति के अनुरूप 

लोक कल्याणकारी राज्य के परिप्रेक्ष्य में 

दायित्व हो गए हैं महत्वपूर्ण 

तकनीकी क्रांति हेतु कृत-संकल्पित 

राजस्व विभाग सजग-सतर्क 

रैयतों की सुविधा-सहायता हेतु 

उपलब्ध हैं अनेक विकल्प। 

ऑनलाइन दाखिल-खारिज 

डिजिटाइज्ड जमाबंदी पंजी निर्माण

जमाबंदी पंजी की त्रुटियों का

‘परिमार्जन’ पोर्टल पर समाधान

ऑनलाइन लगान भुगतान संग

एल.पी.सी का है प्रावधान

शनिवार को थाना पर करना

भू -विवाद का सम्यक समाधान। 

कार्यशैली में सुधार हेतु 

निगरानी पद्धति में संशोधन 

विभाग स्तर से संप्रति विकसित 

‘प्वाइंट ऑफ डिले नोटिफ़िकेशन’

अच्छे कार्य करने पर होगा 

राजस्व कर्मी का मान-सम्मान 

मासिक कार्य मूल्यांकन हेतु 

‘पॉप-पर्सेन्टाइल’ का है प्रावधान। 

निःसंदेह दायित्व है गुरुतर 

महत्वपूर्ण हैं इनके काम 

राजस्व कर्मचारी होते हैं 

प्रशासन की आँख और कान 

ईमानदारी और पारदर्शिता 

समयबद्ध कार्य-अभियान 

प्राप्त शक्ति का रैयत-हित में 

उपयोग करें, पायें सम्मान।।



Friday, January 29, 2021

संस्कार: जीवन सार

चित्तवृत्ति का है संपोषक

'शुद्धिकरण' का है पर्याय

सद्विचार, आचार नियामक

जीवन की नींव हैं संस्कार

वेद, स्मृति, पुराण आधारित

शुद्ध करे अंत: करण,मन- मस्तिष्क

गर्भाधान से अन्त्येष्टि पर्यन्त

सभ्यता - संस्कृति का है प्रतीक।

शांति - समृद्धि का मार्ग प्रशस्त

ईर्ष्या - द्वेष का करे परित्याग

संस्कार आलोकित दीपशिखा

शांत हृदय, सुंदर व्यवहार

मिलती है जीवन में शक्ति

आभूषण  है सोलह संस्कार

अभीष्ट गुणों का करे विकास

जीवन का मधुर संगीत संस्कार।

क्रय - विक्रय की वस्तु नहीं

उपार्जित - अर्जित है संस्कार

जीने की अनुपम पद्धति है

सफल जीवन का मूलाधार

संस्कार विहीन शून्य है जीवन

शिक्षा से समृद्ध संस्कार

जीवन सोपान अलंकृत, झंकृत

संस्कार है जीवन का सार।

अच्छी परवरिश,अच्छा संस्कार

शिक्षा - समाज से सहज प्राप्त

संस्कार मानवता की पहचान

बिन संस्कार जीवन वीरान

संस्कार - मर्यादा विहीन

मानव सचमुच है दीन हीन

जीवन - पथ का अमूल्य पाथेय

संस्कार सफल जीवन का ध्येय।।