Monday, July 6, 2020

तनाव-प्रबंधन


जीवन की गुणवत्ता, गरिमा में,

परिलक्षित हो जब परिवर्त्तन

संतुलन का अभाव जीवन में

चिंतित, विचलित हो मानव-मन

बदला-बदला-सा हो जीवन

एकाकीपन का अहर्निश भान

अव्यवस्थित-अनियमित दिनचर्या

तनावग्रस्तता की पहचान।

अपेक्षा-वास्तविकता में अंतर

प्रियजन वियोग, जीविका ह्रास

सामाजिक अपमान, स्वास्थ्य हानि

निर्णय क्षमता में असामान्य

उचित-अनुचित का नहीं ज्ञान

छिन जाए जीवन की मुस्कान

उपचार-उपाय संबल-सार्थक

तनाव प्रबंध है आवश्यक।

परिवारिक सामाजिक स्थिति

आर्थिक परिदृश्य हो प्रतिकूल

स्वास्थ्यजनित गंभीर समस्या

चिंतित, उद्वेलित मन बिल्कुल

आंतरिक वातावरण, प्रदूषण भी

तनाव-वृद्धि में है उत्प्रेरक

तनावग्रस्तता की स्थिति में

जन-जीवन पर निश्चित संकट।

केन्द्रीय तंत्रिका-तंत्र निर्बल

श्वसन समस्या, हृदय-रोग

त्वचा रोग, मानसिक संताप

जीवन लगता है अभिशाप

झल्लाहट, शंका, स्वर कठोर

जीवन का यह कठिनतम दौर

तिल-तिल कर जलता मानव-मन

स्नेही-स्वजन दें अपनापन।

समय प्रबंधन, सार्थक सोच

हितभुक्, मितभुक्, ऋतभुक् भोग

पर्याप्त निद्रा, शारीरिक कार्य

योग-प्राणायाम अति अनिवार्य

प्रियजन वार्ता और आराम

व्यर्थ बातों का नहीं संज्ञान

अध्यात्म शरण, पालें कुछ शौक

संतुलित जीवन रहें निरोग।

सुख-दुख रहता है आजीवन

कर्म करें, न फल चिंतन

सुख है रंग-विरंगी तितली

पीछा करने पर उड़ जाती

स्वतः बैठती आ कंधे पर

काली घटा में जैसे बिजली

चिंतामुक्त कर्म ही जीवन

तनाव-प्रबंधन का दर्पण-दर्शन।।


3 comments: