जीवन की गुणवत्ता, गरिमा में,
परिलक्षित हो जब परिवर्त्तन
संतुलन का अभाव जीवन में
चिंतित, विचलित हो मानव-मन
बदला-बदला-सा हो जीवन
एकाकीपन का अहर्निश भान
अव्यवस्थित-अनियमित दिनचर्या
तनावग्रस्तता की पहचान।
अपेक्षा-वास्तविकता में अंतर
प्रियजन वियोग, जीविका ह्रास
सामाजिक अपमान, स्वास्थ्य हानि
निर्णय क्षमता में असामान्य
उचित-अनुचित का नहीं ज्ञान
छिन जाए जीवन की मुस्कान
उपचार-उपाय संबल-सार्थक
तनाव प्रबंध है आवश्यक।
परिवारिक सामाजिक स्थिति
आर्थिक परिदृश्य हो प्रतिकूल
स्वास्थ्यजनित गंभीर समस्या
चिंतित, उद्वेलित मन बिल्कुल
आंतरिक वातावरण, प्रदूषण भी
तनाव-वृद्धि में है उत्प्रेरक
तनावग्रस्तता की स्थिति में
जन-जीवन पर निश्चित संकट।
केन्द्रीय तंत्रिका-तंत्र निर्बल
श्वसन समस्या, हृदय-रोग
त्वचा रोग, मानसिक संताप
जीवन लगता है अभिशाप
झल्लाहट, शंका, स्वर कठोर
जीवन का यह कठिनतम दौर
तिल-तिल कर जलता मानव-मन
स्नेही-स्वजन दें अपनापन।
समय प्रबंधन, सार्थक सोच
हितभुक्, मितभुक्, ऋतभुक् भोग
पर्याप्त निद्रा, शारीरिक कार्य
योग-प्राणायाम अति अनिवार्य
प्रियजन वार्ता और आराम
व्यर्थ बातों का नहीं संज्ञान
अध्यात्म शरण, पालें कुछ शौक
संतुलित जीवन रहें निरोग।
सुख-दुख रहता है आजीवन
कर्म करें, न फल चिंतन
सुख है रंग-विरंगी तितली
पीछा करने पर उड़ जाती
स्वतः बैठती आ कंधे पर
काली घटा में जैसे बिजली
चिंतामुक्त कर्म ही जीवन
तनाव-प्रबंधन का दर्पण-दर्शन।।

बहुत सुंदर ये चंद पंक्तियां
ReplyDeleteSuperb 👌👌
ReplyDeleteबहुत ही बढ़िया👌🏼
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