विधि के विधान के आगे
नतमस्तक, बेबस, लाचार
निष्ठुर और निर्दयी कोरोना
लील रहा है घर-परिवार
मायूसी बदल रही मातम में
उजड़ रहा सुखी संसार
कभी-कभार जलती थीं लाशें
लंबी लगी है आज क़तार।
अस्पताल
में आपाधापी
ऑक्सीज़न
की पड़ती मार
अगले
पल का कहना मुश्किल
किसकी
बारी अबकी बार
घातक
है कोरोना वाइरस
सर्वत्र
मचा है हाहाकर
स्वयंसेवी
संस्थाएँ सक्रिय
प्रयासरत
है राज्य सरकार ।
संक्रमण की स्थिति है नाज़ुक
आक्रांत देश विश्व परिवार
कोरोना वाइरस से बचाव हेतु
टीकाकरण है अनिवार्य
जाँच, दवा संग आत्म-नियंत्रण
सामाजिक दूरी की दरकार
मास्क का प्रयोग करें निरंतर
अपनी सुरक्षा अपने हाथ ।
जीवंत
जिजीविषा से
परिपूरित
जनमानस
कोरोना
को हराना है
सतर्क,
सावधान रहकर
दृढ़
इच्छाशक्ति, हौसला
सम्बल
है सहायक
जीत
तो है निश्चित
प्रयास
करें हम मिलकर ।।

उत्तम पंक्तियाँ सर।
ReplyDeleteये पंक्तियां अपनी समग्रता से कोरोना महामारी की व्पापकत, भयावहता तथा निष्ठठुरता की ओर इंगित करती हैं साथ ही साथ सचेत करते हुए आशा का संचार भी करती हैं।
निश्चित रूप से मानव अपनी जिजीविषा और जीवटता से अवश्य ही इस विपदा से उबर जाएगा।
आपका,
कुमार गौरव
पटना।