Wednesday, April 21, 2021

अंतर्द्वंद्व


असमंजस, विचलित अंतर्मन 

अनिर्णय, एकाग्रता भंग 

अकिंचन, अशांत मानव-मन 

कशमकश, चिंतन-मनन 

दिल-दिमाग में रहे द्वन्द्व  

जीवन में निश्चित अंतर्द्वंद्व । 

                  रिश्तों में खटास-गांठ 

                  तनाव, बेचैनी और अवसाद 

                 झुंझलाहट, आंतरिक झंझावात 

                अहर्निश जारी चक्रवात 

                एकाकीपन, खंडित स्वाभिमान 

                अंतर्द्वंद्व के घातक परिणाम । 

कथनी-करनी में बहुत फर्क 

खुद से भी बोले नहीं सत्य 

नकारात्मक सोच अवरोध करे 

सही निर्णय में बने बाधक 

सही विकल्प चयन मुश्किल 

मानव हो जाता भावशून्य । 

                अंतर्मन की आवाज सुनें 

                बदलाव-परिवर्तन अंगीकार 

                नकारात्मक सोच से रहें दूर 

                सकारात्मक हो सोच-विचार 

                सत्कर्म आधारित दिनचर्या 

                संतुलित जीवन का सदप्रयास ।

अंतर्द्वंद्व जीवन का अंश 

समस्याएं हैं अनगिन -अनंत 

संकल्प-शक्ति, आत्मविश्वास 

डर का साहस से प्रतिकार 

मानव करे अपना कर्तव्य 

वक्त के निर्णय का नहीं विकल्प ।। 


Friday, April 16, 2021

अमृत जल-सा जन-जीवन हो

 

जन-जीवन जल-सा हो निर्मल

जीवन में जल-सा उमंग हो

अविरल बहता जल-प्रवाह सा

जय-विद्युत-सा शक्तिमान हो

वारिधि-सा धीर-गम्भीर भाव

जीवन शीतल जल फुहार हो ।

               शीतल जल-सा हो मृदु स्वभाव

                जीवों के प्रति दया भाव हो

                जल के बिना असंभव जीवन

                जल-संरक्षण ध्येय मात्र हो

                चट्टानों से संघर्ष अनवरत

                लक्ष्य प्राप्ति का विजयी भाव हो ।

पारदर्शिता हो परिलक्षित

स्वच्छ और निर्मल चरित्र हो

जलयात्रा सम जीवन यात्रा

श्रमशक्ति मानव शृंगार हो .

जल पर ही आधारित जीवन

प्रकृति प्रेम जीवन आधार हो ।

            कल-कल जल, जीवन पर्याय हो

            कर्मगति सहर्ष स्वीकार्य हो

            नील धवल जल सा हो जीवन

            लेशमात्र नहीं द्वेशभाव हो

            प्रगति मार्ग पर सतत् अग्रसर

            अमृत जल सा जन-जीवन हो ।।

Friday, April 9, 2021

नारी घर-परिवार की नींव

 

घर-परिवार की योजक होती

धैर्य की होती है प्रतिमूर्ति

कार्य-व्यवहार से निपुण-दक्ष

सहयोग समन्वय की देती सीख

घर की लक्ष्मी होती नारी

नारी घर-परिवार की नींव ।

                   नारी की पूजा जिस घर में

                   रहती सुख-शान्ति, समृद्धि

                   श्रीवृध्दि होती है निश्चित

                   नकारात्मक शक्तियाँ रहती दूर

                   संस्कारों की जननी होती

                   नारी घर-परिवार की नींव ।

सीता और सावित्री होती

मैत्रेयी, मदालसा, गार्गी

सुर-वंदिता ज्ञान-बुद्धि की

शक्तिस्वरूपा अप्रतिम

परम मित्र होती है नारी

नारी घर-परिवार की नींव ।

                सकारात्मक परिणाम दृष्टिगोचर

                भागीदारी फिर भी न्यून

                समता मूलक लोकतंत्र में  

                नारी रखती दिव्यदृष्टि 

                नर-नारी प्रगति के पहिए

                मिलकर गाएँ जीवन गीत      

नारी नारायणी है सचमुच

नारी सशक्तिकरण है अभीष्ट

जीवन के सभी क्षेत्रों में

समान अवसर, समान नीति

प्राणवायु है समाज की

नारी देश की सुदृढ़ नींव ।।

 

 

Monday, April 5, 2021

एकाकीपन का दंश


दुखी, व्यथित, उद्वेलित मन 

अकिंचन, कटा-कटा जीवन 

सामाजिक कार्यों से मोह भंग 

दैनिक चर्या में नहीं तारतम्य

उत्साहहीन, निष्क्रिय, वीरान 

एकाकीपन की है पहचान । 

न हितैषी ना कोई मीत

कर्णप्रिय नहीं लगे संगीत

सशंकित चंचल मन भयभीत

निराशा, असहज, गमगीन

देह कई रोगों से ग्रस्त

एकाकी जीवन है अभिशप्त ।

स्वजन से नहीं रहता संपर्क

जीवन बन जाता है नर्क

बरबस आता रहता है ‌क्रोध 

नहीं सही-ग़लत का बोध

मन में आते तुच्छ विचार

एकाकीपन सचमुच है संताप ।

सुख-दुःख का संयोग है जीवन

कल क्या होगा न जाने जन

परिवर्तनशील, नश्वर जीवन में 

घातक एकाकीपन का दंश 

समय चक्र सार्वभौम सतत् 

संतुलित रहें  और स्थितप्रज्ञ । 

आस्था, विश्वास का दीप जलाकर 

जीवन में पाले कुछ शौक 

परोपकार के कार्यों में रत 

जीवन-चर्या हरदम व्यस्त 

एकाकीपन कथमपि  नहीं  स्वर्ग 

सामाजिकता का मार्ग करे प्रशस्त ।

पठन-पाठन, बागवानी, संगीत 

अध्यात्म, योग या प्राणायाम 

सकारात्मक सोच सहेजकर

जीवन को दें नव-आयाम 

खुशी की वजह खोजें जीवन में 

सुख-शांति, संयम का दे पैगाम ।।   


Tuesday, March 30, 2021

गीता: जीवनरेखा

योगेश्वर कृष्ण की वाणी

ज्ञान, कर्म और भक्ति का योग

भाग महाभारत के भीष्म पर्व का

व्यावहारिक मार्ग का उपदेश

उपनिषदों का सार है गीता

सर्वमान्य है ग्रंथ पवित्र

कृष्ण-अर्जुन संवाद के रूप में

वाचनामृत, है मानवमित्र ।

                     अठारह अध्यायों में है वर्णित

                     समाहित हैं सात सौ श्लोक

                     जीवन प्रबंधन, दार्शनिक दृष्टिकोण

                     निष्काम कर्म पर सम्यक् ज़ोर

                     धर्म-कर्म, यम-नियम की चर्चा

                     सृष्टि उत्पत्ति, जीव विकास

                     उपासना-प्रार्थना, मोक्ष, युद्ध

                     राजनीति, मैत्री, आचार-विचार । 

भगवान कृष्ण ने विवस्वान को

विवस्वान ने मनु को बतलाया

मनु ने इक्ष्वाकु को बतलाकर

जीवन का मर्म-रहस्य समझाया

अनिश्चय, हताशा की स्थिति में

गीता सचमुच है पथदर्शक

जटिल समस्यायों से अविचलित

मानव रह सकता स्थितप्रज्ञ ।

                   प्रथम अध्याय में है वर्णित

                   अर्जुन के हृदय का क्लेश-विषाद

                   द्वितीय और तृतीय अध्याय में

                   सांख्य योग, कर्मयोग सविस्तार

                   ज्ञान, कर्म, सन्यास योग का

                   विश्लेषण चतुर्थ-पंचम अध्याय

                   आत्मसंयम, ज्ञान-विज्ञान योग से

                   परिपूरित षष्ठ-सप्तम अध्याय ।

अष्टम में अक्षर ब्रह्मयोग का वर्णन

नवम राज विद्याराज गुह्ययोग

दसम-एकादशम में पाते हैं

विभूति विश्वरूप दर्शन योग

द्वादश में भक्ति योग है वर्णित

त्रयोदश क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विचार

गुणत्रय विचार योग चतुर्दश में

पंचदश का पुरुषोत्तम योग आधार।

                         षोडश-सप्तदस अध्याय में क्रमशः

                         देवासुर संपति श्रद्धात्रय विभाग

                         गीता-सार अंतिम अध्याय में

                         मोक्ष संन्यास योग है अभिप्राय

                         श्रीमद्भगवद्गीता का पठन-अनुशरण

                         अंत: करण करता है शुद्ध

                         जीवन की चिंता, मोहमाया से

                         मानव को मिलती है मुक्ति ।

ज्ञानरूपी प्रकाश है सचमुच

कर्तव्यज्ञान का अनुपम श्रोत

जीवन के मार्गदर्शी सिद्धान्तों से

समस्तग्रंथ है ओतप्रोत

गीता नहीं है ग्रंथमात्र

यह तो है जीवन रेखा

मानव तो निमित्त-मात्र है

कर्म करें, नहीं फल की चिंता।।

Tuesday, March 23, 2021

शब्द-सामर्थ्य


अभिधा,लक्षणा,व्यंजना

शब्द-शक्ति के रूप

कथित,लक्षित,व्यंजित

शब्द हैं ब्रह्म स्वरूप

शब्द शक्ति से ही नि:सृत

     काव्य में रस-संचार

संगीत की स्वर-लहरी में

छिपा शब्द-भंडार ।

शब्दों से ही मिलती है

ताली या आपत्ति

शब्द प्रमाणित औषधि है,

घर लाए सुख-शांति

शब्द-शक्ति से बन जाते है

मनुज के बिगड़े काम

शब्दों पर ही निर्भर हैं

अच्छे-बुरे परिणाम ।

बनते-बिगड़ते, रिश्ते-नाते

शब्दवाण दुश्मन घर लाते

शब्द हार है,शब्द जीत भी

शब्द हँसाते,शब्द रुलाते

दिल-दिमाग़ से सोचें बोलें

शब्द अमृत-विष बरसाते

मधुर शब्दों के वातायन

वातावरण को स्वच्छ बनाते ।

मृदु बोली है रामवाण,

कर सकते निश्चित हितसाधन

जादुई प्रभाव शब्द का,

वाक् संयम,उचित अनुशासन

शब्द है व्यवहार परिचायक,

शब्द प्रकट करते संस्कार

बोलें प्रिय-मधु शब्द सदा,

सार्थक शब्दों का करे व्यवहार।।

 

Saturday, March 20, 2021

स्वतंत्रता नहीं है बंधनों का अभाव

स्वतंत्रता है मनुज का

जन्मसिद्ध अधिकार 

अप्रतिम भाव है 

है सुखद अहसास

संतुष्टि,आत्मसम्मान का

स्वतंत्रता है पर्याय 

प्रबंधन है जीवन का 

नहीं है बंधनों का अभाव ।

                स्वयं के कार्यकलाप का 

                स्वयं से नियंत्रण 

                व्यक्ति और समाज के 

                संबंध का निरुपण

                स्वतंत्रता अधिकार है 

                स्वतंत्रता कर्तव्य भी 

                मनुज की दशा–दिशा  

                सकारात्मक मार्ग भी ।

नैतिक गुणों का श्रोत है 

व्यक्तित्व विकास का आधार 

सोपान है समृद्धि का 

लक्ष्यप्राप्ति का है सार 

सामाजिक सुख-शान्ति हेतु 

स्वतंत्रता है अमूल्य 

स्वतंत्रता तो साध्य है 

इसके अनेक रूप ।

सामाजिक बंधनों में ही

स्वतंत्रता है सार्थक

मानव अस्तित्व का

स्वतंत्रता है रक्षक

स्वतंत्रता का उपभोग करें

औरों का भी रखे ध्यान

सामाजिक जीवन में ही

निहित है मानव कल्याण ।।